DeepFake क्या है? और कैसे काम करता है

DeepFake क्या है? DeepFake Apk/Software कैसे काम करता है - Machine learning - Face Swaping

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जरूरी नहीं जो Videos आप देखते हो वो सच हो किसी भी इंसान का वीडियो अगर आप देखते हो जरूरी नहीं कि उसने ही यह वीडियो बनाया हो। इसीलिए आप जो भी देख रहे हैं उस पर पूरी तरीके से भरोसा ना करें।

क्योंकि आजकल ऐसी टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर इजीली अवेलेबल है जिनसे Fake Videos बनाना संभव है। जी हां मैं बात कर रहा हूं Deepfake कि! Deepfake एक मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ऐसा कॉन्बिनेशन है।

जिससे आप किसी भी वीडियो में किसी का भी चेहरा किसी से Replace कर सकते हैं।और ये काम इतनी Accuracy से किया जाता है कि आप और मैं तो क्या खुद कंप्यूटर भी उसको डिटेक्ट ना कर पाए! इस तरह की Video Manipulation को DeepFake कहा जाता है।

DeepFake Apk/Software कैसे काम करता है

उदाहरण के लिए:- अगर में अपना चेयरा किसी और के चेयरा पर Super imposed करना चाहता हूं। तो मुझे DeepFake सॉफ्टवेयर पर अपनी बहुत सारी Images को आपलोड करनी पड़ेगी और वह मेरी इमेजेस हर एक्सप्रेशन में होगी जिसके बाद अगर मैं बोल रहा हूं तो मेरे फेशियल एक्सप्रेशन क्या है।

या फिर मेरी Voice स्पीच कहां Up और Down है यह सारी बातें DeepFake Software Learn करता है यानी कि वह सीखता है और उसके बाद वह मेरा चेहरा किसी और के चेहरे पर आसानी से सुपरिंपोज कर सकता है।

अब इससे फाइनैंशल फ्रॉड करना इजी हो जाएगा साथ ही किसी को गलत तरीके से पेश करना भी आसान हो जाएगा और फेक न्यूज़ फैलाना वह भी बेहद आसान हो जाएगा और अगर ज्यादा फेक वीडियोस फैलना शुरू हो जाती है तो असली वीडियोस पर भी भरोसा करना मुश्किल हो सकता है।

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DeepFake क्या है? और कैसे काम करता है

चिंता की बात तो यह है कि कई DeepFake सॉफ्टवेयर इजीली अवेलेबल है इंटरनेट पर! DeepFake को यूज करने के लिए आपके पास उस इंसान की ढेरों सारी इमेजेस होनी चाहिए जिसका चेहरा आप यूज़ करना चाहते हैं।

तो DeepFake वीडियोस का इजी टारगेट होते हैं पब्लिक फिगर जैसे सेलिब्रिटीज या फिर पॉलिटिशन क्योंकि इनकी हजारों लाखों फोटोस ऑलरेडी इंटरनेट में अवेलेबल है जिनको कोई भी डाउनलोड करके इनका फेक वीडियो बना सकता है।

वो भी इतना Real कि उसको पहचानना मुश्किल हो जाए कि असली है या नकली है। अब DeepFake से दुनिया को अवगत करने के लिए वर्ल्ड इकोनामिक फोरम Davos में एक जागरूकता कॉर्नर बनाया गया है जहां पर DeepFake नाम की एक कंपनी है जो लोगों को इस पूरे प्रोसीजर के बारे में अवगत कर रही हैं इससे होने वाले नुकसान के बारे में बता रही है और जोखिम क्या है वह बता रही हैं।

आप सोचिए अगर भारत जैसे देश में इलेक्शन के टाइम पर किसी पॉलीटिशियन का फेक वीडियो वायरल कर दिया जाए तो क्या होगा। या फिर किसी सेलिब्रिटी का कोई फेक वीडियो वायरल हो जाए तो उसकी इमेज का क्या होगा जब तक यह पता चल पाएगा कि वह वीडियो Fake था तब तक जो डैमेज है वह हो चुकी होगी।

अब कई सोशल मीडिया Apps भी Face Swaping फीचर का यूज कर रही है। जैसे कि Snapchat पर भी आप Face Swaping Filter देख सकते हैं जहां पर आप अपने फेस पर किसी का भी Super Imposed कर सकते हैं।

हालांकि उसकी Accuracy इतनी ज्यादा नहीं होती आप उसका आसानी से पहचान कर सकते हैं कि यह Fake है! फिर भी वहां पर इस टेक्नोलॉजी का यूज किया जा रहा है तो अगर आप भी किसी पब्लिक फिगर की कोई शॉकिंग वायरल वीडियो देखते हैं तो उस पर आसानी से भरोसा ना करें।

हालांकि आपको यह भी बता दें कि फेक वीडियोस का पता करने के लिए भी Machine learning का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन वह करना आम लोगों के बस की बात नहीं है क्योंकि उसके लिए सॉफ्टवेयर यूज किए जाते हैं वो इंटरनेट पर अवेलेबल नहीं है।

ऐसे में जरूरत है कि फेक वीडियो डिटेक्शन सॉफ्टवेयर को भी आसानी से इस्तेमाल करने लायक बनाया जाए ताकि DeepFake वीडियोस को आसानी से पहचाना जा सके और इन से होने वाले नुकसान से बचा जा सके उम्मीद है कि ऐसा सॉफ्टवेयर जल्दी अवेलेबल होगा और जैसे ही होता है हम आपको इसी लेख में अपडेट कर देंगे।

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