देखिए दुनिया के 7 अजूबों को – Duniya Ke Saat Ajoobe – 7 Wonders in Hindi

न्यू 7 वंडर्स फाउंडेशन द्वारा चुने गए दुनिया के सात अजूबों में क्राइस्ट रिडीमर, कोलोसियम, चीन की दीवार, चिचेन इत्ज़ा, ताजमहल, माचू पिच्चू, पेट्रा

Duniya Ke Saat Ajoobe

हमारी है पृथ्वी अद्भुत और अनोखे संरचनाओं से भरी पड़ी है. और इनमें से कुछ मानव निर्मित है और कुछ प्राकृतिक लेकिन मानव निर्मित कुछ ऐसे प्रतिभाएं जैसे मंदिर, मस्जिद, गिरजा यहां तक की शहर भी शामिल है. लेकिन इनमें से 7 ऐसे अनोखे संरचना है जो सबसे अच्छे और बेहतरीन है. आप इस लेख में इन 7 संरचनाओं के बारे में जानेंगे जिसे Duniya Ke Saat Ajoobe कहते हैं. वर्तमान समय में न्यू 7 वंडर्स फाउंडेशन द्वारा चुने गए दुनिया के सात अजूबों में क्राइस्ट रिडीमर, कोलोसियम, चीन की दीवार, चिचेन इत्ज़ा, ताजमहल, माचू पिच्चू, पेट्रा को शामिल किया गया है.

सूची में जोड़ा गया इजिप्ट का गीजा पिरामिड एक सम्मानजनक स्मारक है दुनिया का कोई आश्चर्य नहीं यानी अजूबे के तौर पर इसे स्थान नहीं दिया गया. विश्व के नए सात अजूबों को चुनने के लिए इंटरनेट और मोबाइल के जरिए वोटिंग किया गया था और इसकी शुरुआत 1999 में स्विट्जरलैंड में हुई थी दुनिया भर के अनोखे 200 से भी ज्यादा धरोहरों पर वोटिंग चली थी. और पूरे दुनिया के लोगों ने उत्साह के साथ इसमें अपना मतदान किया था लगभग 2007 साल में इसका परिणाम घोषित किया गया और परिणाम स्वरूप इंसात धरोहरों को चुना गया और इन्हीं को आज के समय में duniya ke saat ajoobe कहे जाते हैं.

दुनिया के सात अजूबे – Duniya Ke Saat Ajoobe

1. क्राइस्ट रिडीमर
2. कोलोसियम
3. चीन की दीवार
4. चिचेन इत्ज़ा
5. ताजमहल
6. पेट्रा
7. माचू पिच्चु

क्राइस्ट रिडीमर – Christ The Redeemer

दक्षिणपूर्वी ब्राजील के रियो डी जनेरियो शहर के 700 मीटर ऊपर माउंट कोरकोवाडो के शिखर पर स्थित है दुनिया के 7 अजूबे में से एक क्राइस्ट द रिडीमर. क्राइस्ट द रिडीमर स्टेच्यू ये कलाकृति का एक अद्भुत नमूना है ईसा मसीह की जीवित लगने वाली 125 फीट लंबी और 98 फीट चौड़ी इस विशालकाय स्टेचू का निर्माण करने के लिए डिजाइनर का तलाश एक प्रतियोगिता के माध्यम से रखा गया.और उनके दाहिने हाथ में क्रॉस और उनके बाएं हाथ में क्राइस्ट के डिजाइन से प्रभावित होकर ब्राजीलियन इंजीनियर हीटर दा सिल्वा कोस्टा को चुना गया साथी अंतिम डिजाइन पर सिल्वा कोस्टा का फ्रांसीसी मूर्तिकार पॉल लैंडोव्स्की ने काफी सहयोग किया और इन्हीं दोनों के परिकल्पना अनुसार इस विशालकाय मूर्ति की स्थापना 12 अक्टूबर 1931 को हुई थी.

Duniya Ke Saat Ajoobe

यह मूर्ति विश्व के सबसे अनोखे कला से समृद्धि ईसा मसीह की सबसे बड़ी मूर्ति है साथी रियो डी जनेरियो शहर के सबसे लोकप्रिय स्थानों में से एक है यह जगह. धार्मिक गतिविधियों को बढ़ाने के मकसद से इस बिसलकाई मूर्ति का प्रस्ताव सबसे पहले सन 1850 के दशक में विन्सेन्टियन पादरी द्वारा तब के ब्राजील के द्वितीय सम्राट के राजकुमारी पेड्रो मारिया बॉस को सम्मानित करने के लिए ईसाई स्मारक बनाने का सुझाव दिया गया था. हालांकि इस योजना को तब के समय में मंजूरी नहीं मिल पाई थी. लेकिन 4 अप्रैल 1922 को इस विशालकाय मूर्ति को बनाने की इजाजत मिली और 1931 तक इसको बनाकर प्रतिष्ठित कर दिया गया. हाल ही में बने भारत में निर्मित वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति इससे कई गुना ज्यादा बड़ी है.

कोलोसियम – Colosseum

इंसानों के साथ जानवर की लड़ाई, जानवरों से जानवरों का लड़ाई, सांस्कृतिक जैसे सामाजिक और असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था यह कोलोसियम. इस कोलोसियम को फ्लेवियन एम्फीथिएटर भी कहा जाता है. ईसा मसीह के जन्म के बाद लगभग 70 AD से 72 AD के दौरान फ्लेवियन सम्राटों द्वारा इसको बनाने का निर्माण कार्य शुरू हुआ था और लगभग 80 AD मैं इसका निर्माण कार्य पूरा किया गया. इस स्टेडियम में सर्वाधिक 80,000 दर्शक एक साथ बैठकर किसी भी खेल या अनुष्ठान का मजा ले सकते थे और इसे बनाने के लिए बड़े-बड़े पत्थर और कंक्रीट का इस्तेमाल बेहद लाजवाब तरीके से किया गया था.

Duniya Ke Saat Ajoobe

प्राचीन रूम के संस्कृतिक प्रदर्शनी में से यह एक है, मध्यकाल में आसमानी बिजली, भूकंप और अपने ही देश के लोगों द्वारा बर्बरता के कारण कोलोसियम काफी क्षतिग्रस्त हो गया था और बहुत ही कीमती सजावट गायब हो चुकी थी. लेकिन वही 19वीं सदी में प्राचीन रूम के इस बहुमूल्य निदर्शन को संरक्षण करने का काम शुरू हुआ और 1990 में एक परियोजना के तहत यह रूम का प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक बन गया और duniya ke saat ajoobe में से एक को देखने के लिए सालाना रूम में 70 लाख लोग आते हैं.

चीन की दीवार – Great Wall of China

चीन के पूर्व सम्राट किंग शी होएंग जब इस दीवार को बनाने का सोचा था उसके 2000 साल बाद चीन की दीवार बन कर समाप्त हुई थी. लेकिन इस दीवार को चीन के हर एक राज्य के राजाओं ने मिलकर बनवाया था. यह दीवार 6400 किलोमीटर लंबी है और इस दीवार की ऊंचाई अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग है. इसकी सर्वाधिक ऊंचाई 35 फीट है और चौड़ाई इतनी थी कि 6 घोड़े या 10 लोग एक साथ चल सकते थे. इस दीवार को 30 लाख मजदूरों ने मिलकर बनाया था और यह भी कहा जाता है कि निर्माण कार्य के दौरान उनमें से 10 लाख मजदूरों की जान भी चली गई और उन मजदूरों को इसी दीवार में दफना दिया गया इसलिए दुनिया का सबसे बड़ा कब्रिस्तान चीन की दीवार को भी कहा जाता है.

Duniya Ke Saat Ajoobe

चीन के राजाओं द्वारा इस दीवार को बनाने का मुख्य कारण था बाहरी हमलावरों से अपने-अपने राज्यों को सुरक्षित करना और इस दीवार के ईटों को जोड़ने के लिए चावल के आटे का इस्तेमाल किया गया था और यही इसके मजबूती का कारण था. और दोस्तों द वॉल ऑफ चाइना यानी चीन की दीवार मानव निर्मित एक ऐसा ढांचा है जिसे अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है. जहां चीन की दीवार को द ग्रेट वॉल ऑफ चाइना के नाम जाना जाता है वहीं चीन में इसे ” वानली चंग चेंग ” कहां जाता है. 1987 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर के सूची में शामिल कर लिया और यह duniya ke saat ajoobe में से एक महानतम अजूबा है.

चिचेन इत्ज़ा – Chichen Itza

चिचेन इट्ज़ा माया सभ्यता द्वारा 6 वीं शताब्दी बनाया गया एक पुरातात्विक स्थल है. और यह भव्य स्मारक मेक्सिको के युकाटन राज्य में टिनम इलाके में स्थित है. चिचेन इत्ज़ा सिर्फ एक स्मारक नहीं बल्कि एक शहर का प्रतीक था और यह एक बहुत बड़े जन बहुल शहर के बीच बसा था. महान और पौराणिक शहरों में से भी इसे एक माना जाता है. मेक्सिको में पर्यटन का मुख्य केंद्र है यह शहर और लगभग हर साल लाखों लोग इसे देखने आते हैं. यह पिरामिड नुमा आकृति जमीन से 79 फीट ऊंचा है और इसके 4 पक्ष हैं, एक एक पक्ष में 91 सीढ़ियां है. चारों दिशाओं से इसके शीर्ष मंच पर कदम रखने तक यह 365 हो जाती है जो 1 वर्ष को दर्शाता है. 1988 में यूनेस्को के द्वारा इसे विश्व धरोहर का दर्जा मिला है और यह duniya ke saat ajoobe में से एक है.

ताजमहल – Taj Mahal

भारत देश की शान और प्यार का एक अनोखा मिसाल माना जाने वाला ताजमहल उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित है. दुनिया के सात अजूबों में से ताजमहल को बनाने के लिए दुनिया के बेशकीमती पत्थर और हजारों बेहतरीन मजदूरों की जरूरत पड़ी थी और कहा तो यह भी जाता है की ताजमहल बनने के बाद उन मजदूरों के हाथ कटवा दिया गया था ताकि ऐसी इमारत दूसरा ना बन सके. इस इमारत को सन 1631 में बनवाया गया था पांचवे मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा दरअसल इस इमारत को बनाने का मकसद उनके बेगम मुमताज महल को हमेशा याद रखने के लिए था दरअसल बेगम मुमताज की मृत्यु शाहजहां के 14 वे बेटे को जन्म देते हुई थी.

इतिहासकारों का मानना है कि ताजमहल को बनाने के लिए तब के समय के 35 मिलियन डॉलर खर्च हुआ जो आज के समय में लगभग 55 बिलीयन डॉलर्स होती हैं. और शाही खजाने का इतना बड़ा हिस्सा खर्च करने के जुर्म में शाहजहां के बेटे औरंगजेब ने शाहजहां को बंदी बना लिया था और अपनी जिंदगी का आखिरी समय शाहजहां ने बंदी के तौर पर भी बिताया. जमीन से लगभग 240 फीट ऊंची इस इमारत को बनवाने के बाद 22 जनवरी 1666 को शाहजहां की मृत्यु हो गई. दुनिया के सात अजूबों में से एक को बनाने के लिए शाहजहां को आज भी याद किया जाता है.

पेट्रा – Petra

हेलेनिस्टिक और रोमन काल के दौरान पेट्रा एक अरबी साम्राज्य का केंद्र था और इसे प्राचीन अरबी शहरों में गिना जाता है. ग्रीक नाम पेट्रा का अर्थ है चट्टान, पैट्रा शहर पूरी तरह से लाल बैगनी और हल्के पीले रंगों के पत्थरों से बना है इसलिए इस शहर को लाल गुलाब का शहर भी कहा जाता है. पेट्रा विशेष रूप से मसाला व्यापार का एक मुख्य केंद्र था जहां चीन, भारत, मिस्र, ग्रीस सभी जगह के व्यापारी यहां व्यापार करने आते थे तब के समय में इस जगह की आबादी तकरीबन 10 से 30 हजार तक की थी. इस प्राचीन शहर में जल विज्ञान से संबंधित कुछ ऐसे जल नालियां मिली और खुदाई के दौरान प्राचीन कलाकृति और मंदिर के अवशेष भी मिले जो पुराने समय के सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को दर्शाते हैं. अभी के समय में पेट्रा जॉर्डन का एक मुख्य पर्यटन केंद्र बन चुका है.

माचू पिच्चु – Machu Picchu 

उत्तर पश्चिम पेरू से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित है प्राचीन इंका सभ्यता का शहर माचू पिचू. 7,710 फीट ऊंचे पहाड़ों के शिखर पर स्थित है यह प्राचीन शहर पूरी तरह पत्थरों से निर्मित यह शहर प्राचीन युग के निर्माण कार्य का एक अद्भुत नमूना है. मनुष्य द्वारा कैसे इन बड़े-बड़े पत्थरों को इतनी ऊंचाइयों पर ले जाकर एक शहर बनाया गया वो आज भी वैज्ञानिकों के समझ से परे है. इसीलिए इसे सात अजूबों में से एक माना जाता है. वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि सम्राट पचाकुती द्वारा इसे 15वीं सदी में बनाया गया था और यह उस समय के इंका जनजातियों का केंद्र स्थल हुआ करता था. हिरम बिंघम को इस प्राचीन शहर को खोजने का श्रेय दिया जाता है.

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